Bihar Congress Crisis: बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस की प्रदेश इकाई में चल रहा आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के असंतुष्ट नेताओं के एक समूह ने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और एआईसीसी के प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु को हटाने की मांग की है। इन नेताओं ने कथित भ्रष्टाचार और संगठन में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए 8 सितंबर को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
प्रदर्शन की तैयारी कर रहे नेताओं में कांग्रेस प्रवक्ता आनंद माधव, पूर्व विधायक छत्रपति यादव और बिहार युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार राजन शामिल हैं। ये नेता उन नौ नेताओं में हैं, जिन्हें 18 फरवरी को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था।
निष्कासित नेताओं ने फैसले पर उठाए सवाल
निष्कासित नेताओं का दावा है कि बिहार कांग्रेस की प्रदेश इकाई को एआईसीसी की अनुशासनात्मक समिति की उचित मंजूरी के बिना उन्हें पार्टी से बाहर करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने अपने निष्कासन को चुनौती देने के साथ-साथ पार्टी के भीतर संगठनात्मक स्तर पर कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है।
इन नेताओं का कहना है कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अब तक मिलने का समय नहीं दिया गया।
‘खड़गे और राहुल गांधी ने मिलने का समय नहीं दिया’
पूर्व बिहार कांग्रेस रिसर्च विंग प्रमुख आनंद माधव ने दावा किया कि पार्टी संगठन में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उन्होंने और उनके साथियों ने ही उठाया था। उन्होंने कहा कि पिछले साल 3 नवंबर को पटना के एक होटल में उनकी मुलाकात मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल और अशोक गहलोत से हुई थी।
माधव के मुताबिक, उस बैठक में उन्हें विधानसभा चुनाव के बाद मुलाकात का समय देने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, उनके अनुसार कई बार प्रयास करने के बावजूद खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात नहीं हो सकी।
उन्होंने यह भी कहा कि वे उन 47 नेताओं के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जिन्हें चुनाव के बाद नोटिस दिया गया था।
‘संगठनात्मक पद भी बेचे जा रहे हैं’
आनंद माधव ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के अलावा संगठन में कथित अनियमितताएं भी उनके असंतोष की बड़ी वजह हैं। उन्होंने दावा किया कि संगठनात्मक पदों को भी कथित तौर पर बेचा जा रहा है और कुछ नेताओं पर बिहार में कांग्रेस को कमजोर करने का आरोप लगाया।
हालांकि, बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन की बात करने वाले नेता पहले ही पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं।
राजेश राम के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर होने वाली आलोचना को सकारात्मक रूप से लिया जाएगा और इससे संगठन को और मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।
कांग्रेस ने कहा- निष्कासित नेताओं को बातचीत का मौका दिया गया था
बिहार कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने निष्कासित नेताओं से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ अपने मुद्दों पर बातचीत करने को कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
चुनावी हार के बाद 47 नेताओं को नोटिस
बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने 47 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। इन नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे।
आरोपों में पार्टी की आधिकारिक लाइन के खिलाफ सार्वजनिक रूप से असहमति जताना, संगठन के भीतर पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना और चुनाव प्रचार के दौरान सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के खिलाफ सक्रिय रूप से काम करना शामिल था।
हालांकि, नोटिस पाने वाले नेताओं ने आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि प्रदेश नेतृत्व ने मनमाने तरीके से कार्रवाई की और हाईकमान की औपचारिक जांच या मंजूरी के बिना उनके खिलाफ पक्षपातपूर्ण कदम उठाए गए।

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