नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास के आवासीय पते और निजी जानकारी कथित तौर पर ऑनलाइन सार्वजनिक किए जाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कई लोगों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की अदालत में हुई। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।
सौरव दास ने निजता के कथित उल्लंघन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सिविल मुकदमा दायर किया है। याचिका में उन्होंने 2 करोड़ रुपये से अधिक के हर्जाने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने अदालत से प्रतिवादियों को उनके घर का पता और अन्य निजी जानकारी प्रकाशित, प्रसारित या सार्वजनिक करने से स्थायी रूप से रोकने की मांग की है।
X Corp और Google से कंटेंट हटाने की मांग
याचिका में X Corp और Google को भी कथित तौर पर निजी जानकारी उजागर करने वाले कंटेंट को हटाने और उसके आगे प्रसार पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है।
दास की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि मुकदमे में जिन सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख किया गया है, उनमें उनका आवासीय पता कथित तौर पर सार्वजनिक किया गया था। उनके मुताबिक, इनमें से कुछ पोस्ट को X Corp पहले ही हटा चुका है।
सिब्बल ने अदालत से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि हटाए गए पोस्ट दोबारा बहाल न किए जाएं। हालांकि, अदालत ने इस चरण में इस संबंध में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया।
घर के अंदर वीडियो बनाने और ऑनलाइन पोस्ट करने का आरोप
याचिका के अनुसार, सौरव दास 2025 की शुरुआत से ग्रेटर कैलाश-1 स्थित एक साझा आवासीय परिसर के ग्राउंड फ्लोर पर किराए के कमरे में रह रहे हैं। उनका आरोप है कि एक यूट्यूब चैनल के प्रतिनिधि कथित तौर पर परिसर में दाखिल हुए और उनके घर के अंदर का वीडियो बनाया।
दास का दावा है कि यह वीडियो 5 अगस्त को X पर पोस्ट किया गया, जिसमें उनका आवासीय पता सामने आ गया। याचिका के मुताबिक, वीडियो को 21 लाख से अधिक बार देखा गया और 10 अगस्त को इसे दोबारा भी पोस्ट किया गया।
अभिजीत अय्यर-मित्रा पर भी आरोप
दास ने रणनीतिक टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर-मित्रा पर भी आरोप लगाए हैं। याचिका के अनुसार, उन्होंने Law Beat के एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर दास के पड़ोसी का नाम लेकर उनका पता बताया और उनके किराए को करीब 7 लाख रुपये प्रति माह बताया। दास ने इस दावे को गलत बताया है।
याचिका में कहा गया है कि इसके बाद भी उनकी निजी जानकारी से संबंधित कई पोस्ट ऑनलाइन किए गए। दास के मुताबिक, उन्होंने 5 अगस्त को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और संबंधित लोगों को अपनी सुरक्षा को लेकर खतरे की जानकारी दी थी। इसके बावजूद कथित तौर पर उनकी निजी जानकारी का प्रसार जारी रहा।
‘पता सार्वजनिक होने से सुरक्षा का खतरा’
दास ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उन्हें पहले भी हिंसक धमकियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में उनके घर का पता बार-बार सार्वजनिक किए जाने से उन्हें, उनके परिवार और आवासीय परिसर में रहने वाले अन्य लोगों के लिए धमकी, उत्पीड़न और हिंसा का खतरा बढ़ सकता है।
निजता के अधिकार पर हुई बहस
सुनवाई के दौरान अदालत में निजता के अधिकार से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा हुई। अभिजीत अय्यर-मित्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पर्सिवल बिलिमोरिया ने सुप्रीम कोर्ट के Puttaswamy फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आवासीय पता और जन्मतिथि जैसी जानकारी से जुड़े निजता के अधिकार के सवाल को अलग-अलग परिस्थितियों में देखा जाना चाहिए।
इस पर न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने सुप्रीम कोर्ट के 1994 के आर. राजगोपाल बनाम तमिलनाडु सरकार मामले के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें निजी जानकारी और निजता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया गया था।
फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को 10 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी।

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