लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय बाकी है, लेकिन कांग्रेस ने अपने सहयोगी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत जल्द शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। कांग्रेस का मानना है कि गठबंधन में सीटों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि दोनों दल ऐसी सीटों पर चुनाव लड़ें, जहां जीत की संभावना सबसे अधिक हो।
कांग्रेस और सपा दोनों ही प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर अपने स्तर से चुनावी आकलन और सर्वे कर रही हैं। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इन सर्वे का मकसद उन सीटों की पहचान करना है, जहां कांग्रेस का संगठनात्मक आधार और सपा का वोट बैंक मिलकर गठबंधन को मजबूत स्थिति में पहुंचा सकता है।
क्यों जल्द सीट बंटवारे पर बात करना चाहती है कांग्रेस?
कांग्रेस की ओर से बातचीत जल्द शुरू करने की कोशिश को 2017 के विधानसभा चुनाव के अनुभव से जोड़कर देखा जा रहा है। उस चुनाव में सपा और कांग्रेस ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, लेकिन सीटों के बंटवारे और विधानसभा क्षेत्र स्तर पर तालमेल की कमी का असर चुनावी नतीजों पर पड़ा था।
कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक, पिछले चुनाव में गठबंधन को अंतिम समय में आकार दिया गया था और जमीनी स्तर पर दोनों दलों के बीच प्रभावी समन्वय नहीं हो पाया। पार्टी का मानना है कि 2027 में इस तरह की स्थिति से बचने के लिए सीटों को लेकर चर्चा काफी पहले शुरू होनी चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में संसद सत्र के दौरान कांग्रेस के यूपी सांसदों की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ बैठक हुई थी। इसमें पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि सांसदों की राय भी जल्द सीट शेयरिंग पर बातचीत शुरू करने के पक्ष में रही।
कांग्रेस का फोकस ‘ज्यादा सीट’ नहीं, ‘जीतने वाली सीटों’ पर
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी की प्राथमिकता ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि ऐसी सीटें हासिल करना है जहां संगठन और सामाजिक समीकरण पार्टी के पक्ष में हों।
एक कांग्रेस नेता के मुताबिक, पार्टी ऐसी सीटों पर जोर देना चाहती है जहां कांग्रेस का संगठन मजबूत हो और सपा का समर्थन आधार उसके साथ मिलकर जीत की संभावना बढ़ा सके। पार्टी का यह भी मानना है कि केवल इसलिए किसी सीट पर दावा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वहां कांग्रेस लंबे समय से चुनाव लड़ती रही है।
कांग्रेस के एक सांसद ने कहा कि यदि कोई पार्टी किसी सीट पर लगातार कई चुनाव हार रही है, तो उसी पार्टी को सीट देना गठबंधन के लिए जरूरी नहीं है। अगर गठबंधन का दूसरा दल अपने वोट के साथ सहयोगी दल का वोट भी प्रभावी ढंग से ट्रांसफर करा सकता है, तो वह सीट जीतने के लिहाज से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
सभी 403 सीटों पर तैयारी करेगी कांग्रेस
कांग्रेस ने फिलहाल प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनाई है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, इसका उद्देश्य यह नहीं है कि कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, बल्कि सीट शेयरिंग से पहले पूरे प्रदेश में अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति का आकलन करना है।
पार्टी के सर्वे में पिछले चुनावों के नतीजे, जातीय समीकरण, स्थानीय संगठन की स्थिति, संभावित उम्मीदवार की लोकप्रियता और दोनों दलों के वोटों के ट्रांसफर की संभावना जैसे पहलुओं को शामिल किया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि सीटों की पहचान पहले करने से गठबंधन के भीतर आपसी मुकाबले की स्थिति को कम किया जा सकता है और विपक्षी वोटों के बंटवारे को रोकने में मदद मिल सकती है।
सपा भी कर रही सीटों का आकलन
वहीं, समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर फिलहाल सावधानी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। सपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, कांग्रेस के अंदरूनी मामलों पर पार्टी कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती और गठबंधन से जुड़े अंतिम फैसले पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा।
सपा की ओर से संकेत दिया गया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा मुख्य रूप से उम्मीदवार की जीत की संभावना और संबंधित विधानसभा क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
2017 की गलती से सबक लेने की कोशिश
कांग्रेस के जल्द समझौते पर जोर देने की एक बड़ी वजह 2017 का चुनावी अनुभव भी है। 2017 में सपा और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उस समय सपा ने 311 सीटों पर, जबकि कांग्रेस ने 114 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। गठबंधन को कुल 54 सीटें मिली थीं, जिसमें सपा ने 47 और कांग्रेस ने सात सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इसके मुकाबले भाजपा ने 403 सदस्यीय विधानसभा में 312 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। गठबंधन के दौरान कई विधानसभा क्षेत्रों में दोनों दलों के स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल की कमी और आपसी मुकाबले की स्थिति भी देखने को मिली थी।
कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि 2027 में इस अनुभव को दोहराने से बचने के लिए सीट शेयरिंग का फैसला चुनाव के काफी पहले किया जाना चाहिए।
2024 के लोकसभा चुनाव का फॉर्मूला बना आधार
कांग्रेस के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव सपा के साथ गठबंधन के सफल मॉडल का उदाहरण है। लोकसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे पर सहमति बनी थी। सपा ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 62 सीटों पर और कांग्रेस ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था। सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत दर्ज की।
इस प्रदर्शन ने कांग्रेस को यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश में बड़े गठबंधन का हिस्सा रहते हुए सीमित लेकिन जीत की संभावना वाली सीटों पर फोकस करना पार्टी के लिए ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
क्या विधानसभा चुनाव में भी लागू होगा 2024 का फॉर्मूला?
अब कांग्रेस विधानसभा चुनाव में भी इसी तरह के फॉर्मूले पर आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि, इस बार पार्टी सीटों की पहचान और संभावित समझौते की प्रक्रिया चुनाव से काफी पहले शुरू करना चाहती है।
इसका मतलब यह भी हो सकता है कि कांग्रेस सामान्य परिस्थितियों में जितनी सीटों पर दावा करती, उससे कम सीटों पर सहमत हो जाए, लेकिन उन सीटों का चयन जीत की संभावना के आधार पर किया जाए।
फिलहाल कांग्रेस और सपा दोनों अपने-अपने स्तर पर सर्वे कर रही हैं। अंतिम सीट बंटवारा दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद ही तय होगा।
अखिलेश यादव के लिए आसान नहीं होगा फैसला
हालांकि, कांग्रेस की यह रणनीति सपा के लिए कितनी स्वीकार्य होगी, यह बड़ा सवाल है। विधानसभा चुनाव में स्थानीय नेताओं की दावेदारी, संगठनात्मक समीकरण और क्षेत्रीय प्रभाव के कारण सीटों का बंटवारा लोकसभा चुनाव की तुलना में ज्यादा जटिल हो सकता है।
ऐसे में देखना होगा कि कांग्रेस की ‘कम लेकिन जीतने वाली सीटों’ की रणनीति और सपा की अपनी चुनावी तैयारियों के बीच किस तरह सहमति बनती है। 2027 के चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग पर होने वाली बातचीत गठबंधन की दिशा और चुनावी रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

आशीष कुमार सिंह पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने भारत टाइमिंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में स्थापना काल से ही अपना योगदान दिया है। स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम करते हुए वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजनीति पर गहन रिपोर्टिंग और विश्लेषण करते हैं।राष्ट्रीय राजनीति उनकी विशेष रुचि का विषय है। वे समसामयिक घटनाओं, राजनीतिक विकास और जनहित के मुद्दों पर तथ्यात्मक व निष्पक्ष पत्रकारिता करते हैं। समाचार पुलिस वेबसाइट पर उनके लेख और रिपोर्ट्स पाठकों को राष्ट्रीय मुद्दों की सही जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं।आशीष कुमार सिंह का उद्देश्य सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और जनहित को ध्यान में रखकर पत्रकारिता करना है।
