धर्म सबका अपना, सड़क सबकी: कांवड़ और अज़ान पर समान नियम की मांग भक्ति या प्रदर्शन?
New Delhi, 2:15pm | भारत आस्थाओं का देश है। यहां कांवड़ यात्रा निकलती है, मस्जिदों से अज़ान गूंजती है, मंदिरों में जागरण होते हैं और गुरुद्वारों में कीर्तन भी। संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। लेकिन क्या इस स्वतंत्रता का मतलब यह है कि आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी, पढ़ाई, स्वास्थ्य और आवाजाही प्रभावित हो जाए?हर साल लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में शामिल होते हैं। यह उनकी आस्था का विषय है और इसका सम्मान जरूरी है। लेकिन कई शहरों में घंटों ट्रैफिक जाम लग जाता है, स्कूल बंद करने पड़ते हैं, एंबुलेंस को रास्ता निकालने में मुश्किल होती है। कई जगह डीजे, सड़क पर नाच-गाना और सोशल मीडिया के लिए प्रदर्शन भी देखने को मिलते हैं। तब सवाल उठता है—क्या यही सच्ची भक्ति है?इसी तरह सुबह-सुबह लाउडस्पीकर पर अज़ान को लेकर भी लंबे समय से बहस होती रही है। कुछ लोगों को इससे नींद और पढ़ाई में दिक्कत होती है। वहीं मंदिरों के जागरण और धार्मिक जुलूसों में भी तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित करते हैं।

अगर हम निष्पक्ष हैं तो एक ही सिद्धांत अपनाना होगा—नियम सबके लिए समान होने चाहिए। किसी एक धर्म पर सवाल और दूसरे पर चुप्पी, यह न्याय नहीं हो सकता।संविधान का अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2005 के शोर प्रदूषण फैसले में साफ कहा था कि लाउडस्पीकर किसी धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हैं और ध्वनि प्रदूषण के नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे।बहस कांवड़ यात्रा बनाम अज़ान की नहीं है। बहस यह है कि आस्था का प्रदर्शन इस कदर होना चाहिए कि बाकी नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि बेहतर ट्रैफिक प्लान और शोर नियंत्रण सुनिश्चित करे। श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी भी है कि वे अपनी भक्ति को अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ निभाएं।सच्ची आस्था दूसरों की परेशानी पर नहीं खड़ी होती। वह संयम, सेवा और सह-अस्तित्व सिखाती है। धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन सड़क, कानून और सार्वजनिक व्यवस्था सबकी साझा संपत्ति है। इसलिए नियम भी सबके लिए समान होने चाहिए—चाहे कांवड़ यात्रा हो, अज़ान हो या कोई अन्य धार्मिक आयोजन। यही संविधान की भावना है और यही सभ्य समाज की पहचान।

आशीष कुमार सिंह पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने भारत टाइमिंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में स्थापना काल से ही अपना योगदान दिया है। स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम करते हुए वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजनीति पर गहन रिपोर्टिंग और विश्लेषण करते हैं।राष्ट्रीय राजनीति उनकी विशेष रुचि का विषय है। वे समसामयिक घटनाओं, राजनीतिक विकास और जनहित के मुद्दों पर तथ्यात्मक व निष्पक्ष पत्रकारिता करते हैं। समाचार पुलिस वेबसाइट पर उनके लेख और रिपोर्ट्स पाठकों को राष्ट्रीय मुद्दों की सही जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं।आशीष कुमार सिंह का उद्देश्य सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और जनहित को ध्यान में रखकर पत्रकारिता करना है।

