राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू से आज पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक और मजबूत संदेश देशभर में गूंज उठा। अरावली पर्वतमाला को बचाने के संकल्प के साथ 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का भव्य शुभारंभ किया गया। इस जन आंदोलन की शुरुआत माउंट आबू स्थित शक्ति पीठ अर्बुदा देवी मंदिर से हुई, जहां साधु-संतों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद कलश यात्रा निकाली गई, जो माउंट आबू के प्रमुख पर्यटन स्थल नक्की झील तक पहुंची। इस पदयात्रा का नेतृत्व छात्र राजनीति के चर्चित चेहरे निर्मल चौधरी कर रहे हैं। यात्रा का उद्देश्य अरावली पर्वतमाला पर मंडरा रहे गंभीर खतरों, अवैध खनन, जंगलों की अंधाधुंध कटाई और पर्यावरणीय संतुलन को हो रहे नुकसान के प्रति आमजन को जागरूक करना है। नगर भ्रमण के दौरान कार्यकर्ताओं ने स्थानीय नागरिकों से संवाद किया और अरावली को बचाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। इस मौके पर निर्मल चौधरी ने कहा कि अरावली सिर्फ पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक धरोहर और जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा केवल पैदल चलने का अभियान नहीं, बल्कि सोए हुए तंत्र, प्रशासन और समाज को जगाने का प्रयास है। माउंट आबू में कार्यक्रमों के समापन के बाद पदयात्रा पहाड़ों के नीचे आबूरोड की ओर रवाना हो गई। आने वाले दिनों में यह यात्रा राजस्थान के कई जिलों और सैकड़ों गांवों से होकर गुजरेगी। माना जा रहा है कि यह अरावली आंदोलन न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे उत्तर भारत में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक नई चेतना और जन आंदोलन को जन्म देगा।
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