गोरखपुर: शहर में नकली ब्रांडेड नमक की री-पैकिंग का गोरखधंधा बेधड़क जारी है। सूत्रों के मुताबिक, कानपुर से थोक में सस्ता पिसा हुआ नमक मंगाया जाता है और उसे गोरखपुर में नामी ब्रांड्स के रैपर में पैक कर बाजार में बेचा जा रहा है।
इस मिलावटी नमक को “टाटा” या अन्य मशहूर ब्रांड्स के नाम से बाजार में उतारा जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को असली और नकली नमक में फर्क करना लगभग नामुमकिन हो जाता है। ये पैकेट खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे दुकानदारों तक आसानी से पहुंचाए जा रहे हैं।
खतरनाक बात यह है कि नमक को फ्री फ्लो बनाने के लिए इसमें पोटैशियम फेरोसायनाइड जैसे रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है, जो बिना किसी गुणवत्ता परीक्षण के मिलाया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह के रसायन युक्त नमक का लंबे समय तक सेवन लिवर और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
यह पूरा नेटवर्क नौसड़, ट्रांसपोर्ट नगर और लालडिग्गी जैसे इलाकों में चोरी-छिपे चलाया जा रहा है। नकली रैपर्स दिल्ली से लाकर लोकल स्तर पर इतने कुशलता से पैकिंग की जाती है कि आम ग्राहक ठगा जाता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि प्रति पैकेट 12 से 15 रुपये तक के मुनाफे के लालच में लोग इस काम को अंजाम दे रहे हैं, भले ही इसके चलते लोगों की सेहत खतरे में पड़ रही हो।
गोरखपुर शहर में नमक की री-पैकिंग का खेल लंबे समय से चल रहा है। कानपुर से थोक में पिसा हुआ सस्ता नमक यहां लाया जाता है और यहां उसे नामी-गिरामी ब्रांड के पैकेट में पैक कर बाजार में खपा दिया जाता है।
नमक में नमी रोकने के लिए एंटी केकिंग एजेंट के तौर पर पोटैशियम फेरोसायनाइड मिलाया जाता है। इससे नमक फ्री फ्लो हो जाता है। 12-15 रुपये प्रति पैकेट के मुनाफे के चक्कर में धंधेबाज लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से ऐसा नमक खाने से लिवर खराब हो सकता है। गोरखपुर के नौसड़, ट्रांसपोर्टनगर और लालडिग्गी इलाके के कुछ घरों में चोरी-छिपे चल रहा है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, थोक में सस्ता नमक लाने के बाद उसे ब्रांडेड पैकेट में भरा जाता है। इस खेल में प्रति पैकेट करीब 12 से 15 रुपये तक का मुनाफा होने के कारण इसमें शामिल लोग जोखिम उठाने से भी पीछे नहीं हटते।
दिल्ली से लाए गए रैपर में स्थानीय स्तर पर बनाई गई नकली पैकिंग इतनी सटीक होती है कि पहली नजर में ग्राहक को असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।
खासतौर पर ग्रामीण इलाकों और छोटे दुकानदारों तक ये नकली पैकेट बड़ी आसानी से पहुंच जाते हैं। उपभोक्ताओं को न केवल ठगी का शिकार होना पड़ता है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ने का खतरा बना रहता है। क्योंकि बिना किसी जांच-पड़ताल और गुणवत्ता मानक के यह नमक पैक किया जाता है।

