दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की एक सरकारी बैठक में उनके पति मनीष गुप्ता की मौजूदगी पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए सवाल उठाए हैं। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री को यह अधिकार नहीं है कि वो अपने जीवनसाथी को आधिकारिक बैठकों में शामिल करें।
इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी बचाव में उतर आई है। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि आम आदमी पार्टी को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को निशाना बनाने के लिए कुछ और मुद्दे तलाशने चाहिए।
मालवीय ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह बैठक मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र की समीक्षा से जुड़ी थी, जिसमें उनके पति सहयोगी की भूमिका में थे। उन्होंने कहा कि ऐसी मिसालें पहले भी रही हैं—जैसे पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की बहन रमा धवन या अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल, जो उनके क्षेत्र में सक्रिय रही हैं।
मालवीय ने यह भी स्पष्ट किया कि मनीष गुप्ता ने न तो किसी प्रकार की सरकारी कुर्सी संभाली, न ही ऐसा कोई आदेश जारी किया जिसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई हो। उन्होंने कहा कि केवल महिला होने के कारण मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को निशाना बनाना गलत है। वह निरंतर प्रभावशाली कार्य कर रही हैं और अपनी मेहनत से अरविंद केजरीवाल की राजनीति को पीछे छोड़ रही हैं।

