उत्तर प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेज छात्रों और अभिभावकों का खुला आर्थिक शोषण कर रहे हैं। 2024-25 सत्र में तय फीस पर दाखिला लेने के बावजूद बीच सत्र में मनमाने ढंग से लाखों रुपये की अतिरिक्त वसूली की जा रही है और अब कॉलेजों ने यह तक साफ कह दिया है कि बढ़ी हुई फीस जमा न करने वाले छात्रों को परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा। कानपुर के निजी मेडिकल कॉलेज ने 12.66 लाख की वार्षिक फीस को बढ़ाकर 15.19 लाख कर दिया।हापुड़ के कॉलेज ने 11.78 लाख से 14.14 लाख कर दी। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा ऐसी वसूली पर रोक लगाए जाने के बावजूद कॉलेज प्रबंधन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। यह न केवल स्थापित नियमों के विरुद्ध है (जिनमें यह स्पष्ट है कि बीच सत्र में फीस वृद्धि नहीं की जा सकती तथा अधिकतम सीमा 5% प्रतिवर्ष अथवा 15% तीन वर्षों में निर्धारित है), बल्कि छात्रों के भविष्य और अभिभावकों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रहार है।
प्रदेशभर के निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों के अभिभावकों ने मनमाने तरीके से फीस वसूलने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है। प्रदेश के निजी कॉलेजों में वर्ष 2024-25 में छात्रों ने दाखिले के दौरान तय की गई फीस के आधार पर दाखिला लिया। तमाम कॉलेज कोर्ट चले गए और बीच में फीस बढ़ा दी गई। अब कॉलेजों ने साफ कह दिया है कि बढ़ी हुई फीस जमा नहीं करने वाले छात्रों को परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। ऐसे में अभिभावक परेशान हैं।

