उत्तर प्रदेश के कानपुर के घंटाघर में एक ऐसा सिद्धिविनायक मंदिर स्थित है, जिसे अंग्रेजों के समय क्रांतिकारियों ने छिपकर बनाया था. क्योंकि अंग्रेजी शासक इसके निर्माण की इजाजत नहीं दे रहे थे. महान क्रांतिकारी बाल गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र में इसी महोत्सव से क्रांतिकारियों को एकजुट किया था. यही वजह थी कि कानपुर में बैठे अंग्रेजी हुक्मरान इसको बनने की इजाजत नहीं दे रहे थे.
ये मंदिर मकान नुमा आकार में बना हुआ है, जो अंदर से काफी खूबसूरत है. मंदिर के अदंर पहुंचने पर भगवान के घर के जैसा महसूस होता है. मंदिर की दूसरी मंजिल पर भगवान सिद्धिविनायक के साथ उनके नौ अवतार और तीसरी मंजिल पर 10 मुखी अवतार की प्रतिमा देखने को मिलेगी. जिस वक्त इस मंदिर का निर्माण हुआ, अंग्रेजों की हुकूमत थी. क्रांतिकारी आंदोलन हो रहे थे. अंग्रेजों के मना करने के बावजूद इस मंदिर का निर्माण अंदर-अंदर होता रहा. इस मंदिर की नींव बाल गंगाधर तिलक ने 1918 में रखी थी.

