लखनऊ। उत्तर प्रदेश के एडीजी ट्रैफिक के. सत्यनारायण ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) की अर्जी देकर पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी है। 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी सत्यनारायण ने निजी कारणों का हवाला देते हुए वीआरएस मांगा है। वर्तमान में उनका आवेदन शासन के विचाराधीन है।
सत्यनारायण को जून 2024 में एडीजी ट्रैफिक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि उनकी नियत सेवानिवृत्ति अक्टूबर 2027 में होनी थी। यानी, अभी उनके कार्यकाल में लगभग 2 साल बाकी हैं। बीते आठ वर्षों में वे यूपी कैडर के तीसरे वरिष्ठ आईपीएस हैं जिन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। इससे पहले डीजी आशीष गुप्ता और एडीजी असीम अरुण ऐसा कर चुके हैं।
महाकुंभ ट्रैफिक संकट के बाद बढ़ा दबाव
विश्व प्रसिद्ध प्रयागराज महाकुंभ 2025 की तैयारियों के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बाद सत्यनारायण के फैसले को अहम माना जा रहा है। भारी जाम और अव्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नाराज़गी जताई थी। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए श्रद्धालुओं की परेशानी का मुद्दा उठाया था।
क्लीन छवि, अनुशासित अफसर
अपने लंबे करियर में सत्यनारायण ने यूपी पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। उन्हें एक अनुशासित और दक्ष प्रशासक के रूप में जाना जाता है। इससे पहले वे एडीजी सीबीसीआईडी जैसे संवेदनशील पद पर भी रह चुके हैं। उनके ट्रैफिक निदेशालय में आगमन को व्यवस्थागत सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना गया था।
अब सभी की निगाहें शासन के निर्णय पर हैं। यदि उनका वीआरएस स्वीकार हो जाता है, तो यूपी ट्रैफिक विभाग को नए नेतृत्व की तलाश करनी होगी।

