उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में बहुजन समाज पार्टी (BSP) पूरी ताकत झोंकने जा रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने घोषणा की है कि BSP संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर 9 अक्टूबर को लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल पर एक विशाल जनसभा का आयोजन करेगी।
पार्टी का दावा है कि इस कार्यक्रम में पांच लाख से अधिक समर्थकों की भागीदारी होगी। BSP इसे न केवल एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है, बल्कि कार्यकर्ताओं में नए जोश और ऊर्जा का संचार करने का अवसर भी मान रही है।
हाल के वर्षों में BSP का जनाधार कमजोर हुआ है — 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी महज एक सीट पर सिमट गई, और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे यूपी से कोई भी सीट नहीं मिल पाई। ऐसे में 2027 का चुनाव BSP के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन गया है।
यह महासभा न केवल पार्टी की सक्रियता और संगठन की ताकत का प्रदर्शन होगी, बल्कि एक बार फिर बहुजन वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश भी होगी। मायावती इस आयोजन के ज़रिए 2007 जैसी जीत की नींव रखना चाहती हैं।

