भारत में बेटियां किसी भी घर की रौनक होती हैं, उनको परिवार की इज्जत माना जाता है। ऐसे में उनका पालन पोषण बेहद देखरेख के साथ किया जाता है। माता पिता बेटी को पढ़ाना भी चाहते हैं और आत्मनिर्भर भी बनाना चाहते हैं, इसके लिए वह बेटी को घर के बाहर भेजते हैं।
हालांकि लड़कियों की सुरक्षा आज के दौर में माता पिता के लिए सबसे चिंता का विषय होती है। इस दौरान उम्र बढ़ने के साथ ही बेटियों के जीवन में शारीरिक और मानसिक बदलाव भी होते हैं। यह वह समय होता है जब माता-पिता का साथ और सीख बेटी में आत्मविश्वास, नवाचार और जीवन के लिए सकारात्मक नजरिए की नींव रखने में सहायक होती है।
हर लड़की को यह समझना जरूरी है कि अपनी असहमति जताना गलत नहीं है। चाहे वह दोस्ती हो, रिश्ते हों या सामाजिक दबाव, जहां जरूरत हो वहां “ना” कहने की हिम्मत जरूर होनी चाहिए।

